निजी अस्पताल, फिजीशियन और केमिस्टों को अब रोज तैयार करना पड़ेगा मरीजों का डाटा
जिले के मेडिकल स्टोर संचालक व प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों को अब बुखार, सर्दी, गले में संक्रमण,फ्लू, सांस संबंधी तकलीफ और इससे मिलते-जुलते लक्षणों की दवाई खरीदने वाले व्यक्ति या रोगी का नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि दर्ज कर जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए गए गूगल वर्कशीट पर भेजना पड़ेगा। इसमें कोताही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हाल ही में वर्कशीट को तैयार किया गया है। इसमें मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र, डॉक्टर विशेष कर जनरल फिजीशियन, जो प्राइवेट क्लीनिक चला रहे हैं और रोगी अथवा व्यक्तियों को फ्लू व सांस संबंधी लक्षणों की दवाइयों की बिक्री कर रहे हैं, वह हर हाल में सभी का रिकार्ड जिला प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग को सौंपेंगे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग रिपोर्ट के आधार पर संभावित मरीजों की तलाश कर उनका समुचित उपचार करेगा। अधिकारियों के अनुसार इससे कोविड-19 की रोकथाम में मदद मिलेगी और जिले को इस महामारी से बचाया जा सकेगा। इसमें आशा वर्कर्स की भी मदद ली जाएगी। उनकी मदद से खांसी, बुखार, जुखाम, गले में संक्रमण आदि के मरीजों का सर्वे कराया जाएगा।
रिपोर्ट की इस तरह से की जाएगी स्क्रीनिंग
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव भगत के अनुसार मेडिकल स्टोर, जनऔषधि केंद्र व प्राइवेट क्लीनिक चला रहे जनरल फिजीशियन की ओर से रोज करीब 150 से 200 मरीजों का डाटा भेजा जा रहा है। यह डाटा जिला प्रशासन के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचता है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग आशा वर्कर को बताए गए नाम-पते पर भेजता है। वहां मरीजों का सर्वे किया जाता है। उनसे इस दौरान बीमारियों के बारे में पूछा जाता है और फिर वह रिपोर्ट नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को दी जाती है। इसके बाद सर्दी, खांसी, बुखार आदि के मरीजों का नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के ओपीडी में उपचार किया जाता है। उन्होंने बताया इससे कोरोना वायरस की रोकथाम में काफी मदद मिल रही है।
अभी तक 25 संदिग्ध पाए गए
कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे फ्लू सर्वे अभियान के साथ टीबी के संदिग्धों की भी तलाश हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सभी मेडिकल स्टोर संचालक, औषधि केंद्र, प्राइवेट क्लीनिक चला रहे डॉक्टरों से कहा गया है कि 2 हफ्ते से खांसी वाले मरीज अगर उनके पास दवाई लेने पहुंचें तो उसकी जानकारी, नाम-पता, मोबाइल नंबर आदि रिकार्ड तैयार कर भेजे। इससे टीबी संभावित मरीजों की तलाश में आसानी होगी। इसके अलावा डोर-टू-डोर सर्वे में आशा वर्कर लाेगाें से खांसी के बारे में पूछती हैं। स्वास्थ्य विभाग के टीबी विभाग के इंचार्ज व डिप्टी सीएमओ डॉ. शीला भगत के अनुसार फ्लू सर्वे में 25 ऐसे व्यक्तियों को चिह्नित किया गया है, जिनमें टीबी के लक्षणों की संभावना है। इन सभी के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा गया है। साथ ही उन्हें जरूरी निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने बताया लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट एक-दो दिन बाद आएगी।
स्वास्थ्य विभाग रोज 26 हजार घरों का सर्वे कर रहा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में हर दिन 26 हजार घरों का सर्वे किया जा रहा है। इसके लिए 1062 आशा वर्कर्स की ड्यूटी लगाई गई है। सभी से कहा गया है कि एक आशा वर्कर कम से कम 25 घरों का सर्वे करें और सर्दी, खांसी, बुखार पीड़ित मरीजों की पहचान कर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करे। डिप्टी सीएमओ डॉ. रमेश ने बताया कि जिले में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए पूरी तरह प्रयास जारी हैं। आशा वर्कर सर्वे के साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को अवेयर कर रही हैं। सभी को घर में ही रहने की सलाह दी जा रही है।
2 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मी कर रहे मेहनत
स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ डॉ. रामभगत के अनुसार कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए विभाग के करीब 2600 कर्मचारी लगे हैं। वह डेढ़ महीने से इस बीमारी से जंग लड़ रहे हैं। किसी को भी छुट्टी नहीं मिल रही है। क्योंकि मार्च में ही सभी स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी गई थीं। उन्होंने बताया कोरोना की रोकथाम में निजी डॉक्टरों से भी मदद ली जा रही है। लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। सभी को घर में ही रहने की सलाह दी जा रही है। उनको कहा गया है कि घर में रहकर की खुद को सेफ रखा जा सकता है।
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